मेरा ऐसा मानना है की, किसी को किसी भी चीज़ से जबरदस्ती रोको तो आप उसे वो काम करने के लिए उल्टा प्रेरित करते है!

बाबा लोगों को सुट्टेबाज़ लौंडिया का सलाम…!तो हुआ यूँ की परसो शाम, हमने सोचा की चल कर नया साल मनाया जाए, अहमदाबाद नया

हीरोइनों के दुपट्टे में बंधी मीडिया, खुद की ही खबर नहीं!

बाबा लोगों को सुट्टेबाज़ लौंडिया का सलाम! तो आज सुबह नींद खुली तो सोचा कुछ न्यूज़ पढ़ ली जाए, तो एक कप चाय

कभी तो ऐसा लगता है इंसानियत मर गई है, फिर कभी लगता है तड़फड़ा रही है, दम तोड़ने वाली है, उफ़्फ़!

सुट्टेबाज़ लौंडिया का सलाम बाबा लोग! सो आज का अखबार उठाये तो पता चला की एक ६३ साल के अंकल जी को ४

हैल्लो जी! मेरा नाम है सुट्टेबाज़ लौंडिया, हाँ वही जिसे सड़को पर तुम सब घूरते जाते हो!

हैल्लो जी! मेरा नाम है सुट्टेबाज़ लौंडिया, मैं स्लटी सावित्री की बहन हूँ, अरे हाँ वही, जिसका नाम पढ़ कर ही आप सोचते